Search This Blog

Tuesday, October 22, 2019

श्री सिद्धमङ्गलस्तोत्रम्




श्रीमद्नन्त श्रीविभूषित अप्पल लक्ष्मी नरसिंहराजा ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।१।।

श्रीविद्याधरी राधासुरेखा श्रीराखीधर श्रीपादा ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।२।।

माता सुमती वात्सल्यामृत परिपोषित जय श्रीपादा ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।३।।

सत्यऋषिश्वर दुहितानन्दन बापनार्यानुत श्रीचरणा ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।४।।

सवित्रकाठकचयन पुण्यफल भारद्वाजऋषि गोत्रसम्भव: ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।५।।

दो चौपाती देव लक्ष्मि गण सङ्ख्याबोधित श्रीचरणा ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।६।।

पुण्यरूपिणी राजमाम्बसुत गर्भपुण्यफल सञ्जाता ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।७।।

सुमतीनन्दन नरहरीनन्दन दत्तदेव प्रभु श्रीपादा ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।८।।

पीठिकापुर-नित्यविहारा मधुमतीदत्ता मङ्गलरूपा ।
जय विजयी भव दिग्विजयी भव श्रीमद्खण्ड श्रीविजयी भव ।।९।।

            ।। इति श्रीसिद्धमङ्गलस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।।