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Sunday, September 27, 2020

श्रीकृष्ण कृपाकटाक्ष स्तोत्रम्

अथ श्रीकृष्ण कृपाकटाक्ष स्तोत्रम्

भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं । 
स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम् ।।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं । 
अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ।।१।।

मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं । 
विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् ।।
करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं । 
महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्ण वारणम् ।।२।।

कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं । 
व्रजांगनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम् ।।
यशोदया समोदया सगोपया सनन्दयाा । 
युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ।।३।।

सदैव पादपंकजं मदीय मानसे निजं । 
दधानमुक्तमालकं नमामि नन्दबालकम् ।।
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं । 
समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ।।४।।

भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं । 
यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् ।।
दृगन्तकान्तभंगिनं सदा सदालिसंगिनं । 
दिने-दिने नवं-नवं नमामि नन्दसम्भवम् ।।५।।

गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं । 
सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनं ।।
नवीन गोपनागरं नवीनकेलि-लम्पटं । 
नमामि मेघसुन्दरं तडित्प्रभालसत्पटम् ।।६।।

समस्त गोप मोहनं, हृदम्बुजैक मोदनं । 
नमामिकुंजमध्यगं प्रसन्न भानुशोभनम् ।।
निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकंं । 
रसालवेणुगायकं नमामिकुंजनायकम् ।।७।।

विदग्ध गोपिकामनो मनोज्ञतल्पशायिनं । 
नमामि कुंजकानने प्रवृद्धवह्निपायिनम् ।।
किशोरकान्ति रंजितं दृगंजनं सुशोभितं । 
गजेन्द्रमोक्षकारिणं नमामि श्रीविहारिणम् ।।८।।